सौराष्ट्र से चीन भेजे जाने वाले तिल-जीरे का व्यापार ठप, उद्योगपतियों ने यात्रा रद्द की
राजकोट / कोरोनावायरस के कारण सौराष्ट्र से चीन जाने वाले उद्योगपतियों ने अपने दौरे रद्द कर दिए हैं। यही नहीं, चीन भेजे जाने वाले तिल और जीरे का निर्यात भी 18 जनवरी से रुक गया है। चीन में सालभर में 15 लाख बोरी जीरे का निर्यात होता है। तिल भी हर साल 85 हजार टन निर्यात की जाती है।
सौराष्ट्र से भेजे जाने वाले तिल का इस्तेमाल चीन में बेकरी प्रोडक्ट्स में किया जाता है। वहीं जीरे का इस्तेमाल वहां बारहों महीने होता है। यहां का जीरा चीनियों को मीठा लगता है, इसलिए वे इसका इस्तेमाल नूडल्स और रसोई में व्यंजन बनाने में होता है।
बहरहाल व्यापार पूरी तरह से ठप्प
बहरहाल कोरोना के कारण सौराष्ट्र से चीन का व्यापार पूरी तरह से ठप्प हो गया है। इसके अलावा राजस्थान, मध्यप्रदेश समेत कई राज्यों में टिड्डियों का हमला हुआ था, जिससे गुजरात के साबरकांठा-बनासकांठा में फसल पर असर हुआ था। टिड्डियों ने यहां की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया था। दूसरी ओर अधिक ठंड के कारण सौराष्ट्र में इस बार केवल 35 लाख बोरीे जीरे का उत्पादन होने की संभावना है।
राजकोट को 2700 टन का टेंडर मिला
कोरिया में हर साल जीरे का टेंडर खुलता है। इस बार कुल 12 हजार टन का टेंडर था। इसमें से 2700 टन का टेंडर केवल राजकोट को ही मिला है। बाकी के हिस्से नाइजीरिया, सूडान और अन्य देशों को मिला है।
इस बार दोगुना उत्पादन
व्यापारी विजय भाई नाग्रेचा ने बताया कि चीन से भले ही तिल-जीरे का एक्सपोर्ट बंद है, पर इससे लोकल मार्केट में कोई असर नहीं हुआ है। भावों में भी कोई कमी नहीं आई है। जीरे की नई आवक अब शुय होगी। इस बार सौराष्ट्र में अधिक ठंड के कारण जीरे का उत्पादन दोगुना होगा, ऐसी संभावना है।